Vaikunth Ekadashi कब और क्यों मनाया जाता है जानिए इसकी विधि के बारे में।

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Vaikunth Ekadashi :-

Vaikunth Ekadashi :- आइये आज हम बात करते है वैकुण्ठ एकादशी के बारे में। ये एकादशी हिन्दू धर्म में बनाई जाती है।  इस एकादशी का हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। हिंदु धर्म में इसकी बहुत मान्यता है। इसका सम्बन्थ भगवान् विष्णु के साथ है। भगवान् विष्णु को खुश करने के लिए इससे मनाया जाता है। इस दिन व्रत करने तथा भगवान्  विष्णु की पूजा करने से  विष्णु जी के धाम वैकुण्ड के द्वार खुल जाते है। इस दिन अगर आप सच्चे मन से भगवान् विष्णु का व्रत करे तथा उनकी पूजा करे तो भगवान् विष्णु बहुत प्रसन होते है तथा आपकी सभी मनोकामना पूर्ण करते  है।

ये पर्व हर वर्ष दिसंबर के महीने में मनाया है। भारतीय स्त्रियों का इस व्रत में बहुत विश्वास है। भारत की स्त्रिया हर वर्ष इस व्रत को रखती है तथा अपनी पूजा अर्चना से भगवान् विष्णु को प्रसन करती है। इस दिन भगवान् विष्णु और प्रभु नारायण के वैकुण्ड द्वार से गुजरना बहुत जरुरी होता है। वैकुण्ड से अभिप्राय भगवान् विष्णु के निवास स्थान से है वैष्ण्वों का का मानना है कि यह 108व दिव्यदेशम छेत्र है।  हिन्दू की आस्ठा इस पर्व में बहुत अधिक है। Vaikunth Ekadashi कब और क्यों मनाया जाता है जानिए इसकी विधि के बारे में।

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी की कथा भगवान् श्रीकृष्ण ने युधिस्तर को सुनाई थी। इस पर्व  के साथ  एक इतिहासिक कहानी जुडी हुई है। एक बार प्रभु नारायण विश्राम क्र रहे थे और मुंडन नामक दानव ने भगवान् को युद्ध के लिए चुनौती दी। मुंडन को वरदान मिला था कि वो किसी भी पुरुष से पराजित नई होगा। नारायण जी ने अपने शरीर की बिभिन क्रियाओ से एक कन्या को उतपन किया।

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  • 2 इसके बाद आप गंगा जल ले तथा पुरे घर को जल से शुद्ध करे तथा थोड़ा सा जल ले छीटे स्व पर भी मरे।
  • 3 इसके बाद आप तुलसी ,फूल, पंचामृत से भगवा विष्णु की पूजा करे।
  • 4 याद रहे आपको ये व्रत निर्जला रखना होता है। इस व्रत में आप कुछ भी नहीं  खा सकते है।
  • 5 यदि आप इस व्रत को निर्जला नई क्र सकते है तो शाम को आप सूरज ढलने के बाद भगवान विष्णु की पूजा आराधना करके फल फूल खा सकते है।
  • 6 इस व्रत के पूर्ण करने के अगले दिन आप गरीबो को भोजन करवाए तथा दान दे और उनसे आशिर्बाद ले।
  • यदि आप इस व्रत को पुरे बिधि विधान के साथ पूर्ण करेंगे तो भगवान् विष्णु आपसे बहुत प्रसन होने तथा आपको मन चाहा फल देंगे।
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