Gita Jayanti कब और क्यों मनाया जाता है ? जानिए गीता जयंती के सही समय, तारीख और विधि के बारे में।

Neha Gurung

Gita Jayanti 

Gita Jayanti : आप सभी को बता दिया जाए कि मोक्षदा एकादशी को ही करुक्षेत्र की रणभूमि में भगवान श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। तभी से इसी दिन गीता जयंती मनाई जाती है। लोग बड़े ही सच्चे मन से गीता जयंती का अध्यन करते है। लोग इस दिन मंदिर जाते है और सच्चे मन से भगवान् जी पूजा करते है। इस दिन मंदिर में भारी मात्रा में लोगो की भीड़ होती है।

Gita Jayanti Date & Day :-

आइए अब हम आगे बात कर ते है गीता जयंती के सही तारिख की तो आप सभी को बता दिया जाए कि गीता जयंती 22 दिसंबर और साथ ही 23 दिसंबर यानी 2 दिन मनाई जायेगी। ग्राह्यस्या 22 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी का व्रत रखेंगे। और साथ ही में वैष्णव 23 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी का व्रत रखेंगे। आप सभी को जानकारी दे दी जाए कि मोक्षदा एकादशी को ही करुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। जिस कारण इस दिन गीता जयंती मनाई जाती है।

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ज्योतिष चर्या SS नागपाल ने बताया है कि एकादशी 22 दिसंबर दिन शुक्रवार की सुबह को 8 बजे 16 मिनट से शुरू होगा और साथ ही में 23 दिसंबर शनिवार की सुबह 7 बजकर 11 वजे पर समाप्त होगा। जिस कारण गीता जयंती को पुरे 2 दिन के लिए मनाया जाएगा। गीता जयंती की तारिख 2 दिन देखने को मिलती है। इस दिन भक्त श्री कृष्ण जी की पूजा करते है और मंदिर भी जाते है। लोग एकादशी के दिन व्रत भी रखते है और अपने अच्छे कर्मो के लिए भगवान् जी के आगे कामना करते है।

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आप सभी को बता दे कि ब्राह्मण महासभा के संस्थापक सुरेश चंद्र शर्मा जी ने बताया है कि इस दिन गीता जयंती के दिन श्री भगवान् कृष्ण जी ने अर्जुन को को अपने धर्म और कर्म के ऊपर के ज्ञान दिया था। महारभारत के समय भगवान् श्री कृष्ण जी ने जो भी अपने धर्म और कर्म से संभंधित जो भी उपदेश दिए गए थे उन्हें गीता के नाम से जाना जाता है। श्री भगवान् कृष्ण जी ने सभी को सच्चे मार्ग पर चलने के लिए कहते थे। उन्होंने अपना आजीवन लोगो की भलाई का कार्य किया और साथ ही धर्म के प्रति ढृढ़ रहने का उपदेश दिया।

Gita Jayanti : एकादशी विधि  

सुबह सुबह जल्दी उठ कर नहाये और साथ ही शुद्ध वस्त्र पेहन ले और इस दिन व्रत रखे। अपने घर के मंदिर में दीपक जलाये और साथस ही भगवान् विष्णु जी का गंगाजल से शुद्ध करे। और भगवान् विष्णु जी का गंगाजल से अभिषेक करे। भगवान् विष्णु जी को पुष्प और साथ ही में तुलसी दल चढ़ाये। फिर भगवान् जी की सच्चे मैं से आरती गाये। आरती सम्पन होने के बाद भगवान् जी को भोग लगाए। भगवान् जी के तैयार किये हुए भोग में तुलसी जी को ज़रूर डाले क्युकि माना जाता है कि भगवान् विष्णु जी कि अगर खाने में तुलसी जी ना हो तो वो अपना खाना ग्रहण नहीं करते।

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साथ ही भगवान् विष्णु जी के साथ माता लक्ष्मी जी की भी आरती गाये। ज़्यादा से ज़्यादा इस दिन भगवान् जी को धयान करे। शाम के समय में भी भगवान जी की सच्चे मन से पूजा करे। इस तरह व्रत आप का सम्पन होता है। सच्चे मन से की गयी भगवान् जी के सभी व्रत और पूजा आप के जीवन में ढेर सारी खुशियों का प्रारम्भ होता है।

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