Shahidi Week :- गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चार साहिबज़ादे के शहीदी के इतिहास के बारे में जानिए।

Neha Gurung

Shahidi Week 

Shahidi Week :- आप सभी को पता ही होगा कि अभी सिख धर्म के शहीदी दिन चल रहे है। शहीदी सप्ताह सीखो के लिए गुरुओ और उन के परिवारों और साथ ही में दिए गए सीखो द्वारा अपने बलिदानो के याद कर ने के दिन चल रहे है। आप सभी को बता दिया जाए कि सिख धर्म ने अपनी कौम को बचाये रखने और निचे न झुकने के लिए कई सीखो वीरो ने अपनी जान की बाज़ी तक लगा दी।

आप सभी को यह बता दिया जाए कि चार साहिबज़ादे 10वें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार बेटे थे। साहिबज़ादा अजित सिंह जो कि (18 वर्ष) के, साहिबज़ादा जुज़ार सिंह जो कि (14 वर्ष) के , साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह जो कि (9 वर्ष) के और साहिबज़ादा फ़तेह सिंह जो कि (9 वर्ष) के थे। सभी को जानकारी होनी चाहिए कि 10वें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार बेटे 21 दिसंबर और 27 दिसंबर के बीच 1704 में शहीद हो गए थे। गुरु गोबिंद सिंह जी के बड़े बेटे साहिबज़ादा अजित सिंह और साहिबज़ादा जुज़ार सिंह चमकौर की लड़ाई के दौरान मुग़ल सैनिको द्वारा मारे गए थे।

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साथ ही गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे बेटो साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह और साहिबज़ादा फ़तेह सिंह 26 दिसंबर 1704 को अपने सिख धर्म से बदल कर इस्लाम धर्म में परिवर्तत होना था। जहाँ उन्होंने ऐसा करने से साफ़ इनकार कर दिया। जहाँ मुगलो ने उन्हें जिन्दा ईंटो में चिनवा दिया गया। वैसे वह शहीद हुए। उन्होंने अपने कौम के लिए अपनी जान तक न्योछावर कर दी परन्तु मुगलो के आगे कभी सिर नहीं झुकने दिया। उन्होने मुगलो से कड़ी से कड़ी टक्कर दी। वह अपने कौम के लिए हमेशा खड़े रहे। इत नी कम उम्र में अपने कौम के प्रति इत ना प्यार किसी को नहीं होगा।

Shahidi Week :- गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चार साहिबज़ादे के शहीदी के इतिहास के बारे में जानिए।

आप सभी को बता दिया जाए कि चार साहिबजादे और माता गुज़री जी की यह शहादत कहानी एक बहुत ही महत्वपूर्ण है। जो आने वाले बच्चो को अपने देश और कॉम के प्रति आस्था रखने से जोड़ी रखती है। यह हमें यह सिख्या देते है कि हमें निडर हो कर अपनी कौम की हर तरह से रक्षा करनी चाहये। प्रेम प्यार की भावना सच्चे मन से होनी चाहये। हमें अपने देश और कौम के लिए जान तक भी न्योछावर कर देनी चाहये।

चार साहिबज़ादे गुरु गोबिंद सिंह जी के चार बेटो के लिए एक प्यार और स्नेह का शुद्ध शब्द है। चार का मतलब चार पुत्र और साहिबज़ादे का मतलब उन के स्नेह पुत्र या वंशज़ो से है। चार साहिबज़ादे ने अपने सिख धर्म की कौम बचने के लिए मुगलो को सबक सिखाया और साथ ही खालसा पंथ की पहचान करने और गरिमा को बचाये रखने के लिए अपनी जान  बलिदान तक कुरबान कर दी।

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तब से साहिबज़ादों के शाहदत दिन के ऊपर हर साल उन के बलिदान की याद में 24 दिसंबर से ले कर 26 दिसंबर तक भारत देश के पंजाब राज्य के फतेहगढ़ साहिब में हर साल शहीदी ज़ोर का मेला आयोजित किया जाता है। लोगो द्वारा सभी यहाँ एकत्रित होते है। शहीदी दिए गए सीखो को याद करते है। कुछ दिन पहले से गुरुद्वारों में सेवा शुरू हो जाती है। लोग रोज गुरूद्वारे जाते है।

Shahidi Week :- गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चार साहिबज़ादे के शहीदी के इतिहास के बारे में जानिए।

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