Ratha Saptami :- जानिए “सूर्य जयंती” के सही समय, तारिख, विधि और महत्व के बारे में। क्या है रथा सप्तमी का इतिहास ?

Neha Gurung

Ratha Saptami 

Ratha Saptami :- जैसा कि आप सभी को बता दे कि हिन्दू धर्म में चल रहे रीती रिवाज़ो काफी ज़्यादा महत्व है। अलग अलग धर्मों में आप को अलग अलग त्योहार तथा अलग अलग रीती रिवाज़ देख ने को आसानी से मिल जाते है। ऐसे ही हिन्दू धर्म में किसी भी पर्व का ख़ास महत्व होता है। आप को बता दे कि ऐसे ही हिन्दू धर्म में रथा सप्तमी एक ख़ास त्यौहार माना जाता है। रथ  सप्तमी हर साल माघ महीने में शुकल पक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है।

Ratha Saptami : History 

रथा सप्तमी के ख़ास अवसर पर भगवान सूर्य देव की पूजा की जाती है। इस रथा सप्तमी को “सूर्य जयंती” भी कहा जाता है। आप को बता दे कि पुरानी कथाओं के मुताबिक, माघ महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को भगवान सूर्य देव अपने रथ पर सवार हो के दुनिया भर में अपनी शक्तियों से रौशनी फैलाना शुरू करते है। जिस कारण तब से इसे रथ सप्तमी या फिर सूर्य जयंती भी कहा जाता है। आप को बता दे कि इस दिन सूर्य देव का जन्म दिन भी मनाया जाता है।

रथ सप्तमी के दिन सूर्य देव के सात घोड़े उन के रथ को खींचना शुरू करते है। इस लिए इसे रथ सप्तमी कहा जाता है। आप को बता दे कि रथ सप्तमी के दिन अगर सच्चे मन से पूजा-पाठ तथा व्रत धारण करते हो तो आप को संतान की प्राप्ति भी होती है। इस लिए रथ सप्तमी को आरोग्य सप्तमी और साथ ही संतान सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है।

Ratha Saptami :- जानिए "सूर्य जयंती" के सही समय, तारिख, विधि और महत्व के बारे में। क्या है रथा सप्तमी का इतिहास ?

Ratha Saptami : Vidhi 

जैसा कि आप सभी को बता दे कि हिन्दू धर्म में कोई भी त्यौहार या फिर पर्व मनाने के लिए रीती रिवाज़ो का काफी ज़्यादा महत्व होता है। हिन्दू धर्म में माना जाता है अगर हम कोई भी पर्व सही समय और सही ात्रीके से करे तो हमें उस का फल कई गुना अच्छा मिलता है। साथ ही सही तरीके से की गयी पूजा पाठ देवी देवताओं को और भी ज़्यादा प्रसन्न करती है। इसी लिए हमें कोई भी पर्व सही विधि अनुसार ही करना चाहिए। आप को बता दे कि रथ सप्तमी के शुभ अवसर के दिन आप सभी को सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। जल्दी उठने के बाद आप को स्नान करना चाहिए।

फिर आप को इस दिन साफ़ सुथरे कपड़ो का ग्रहण करना चाहिए। अगर आप इस दिन व्रत भी रखते हो तो भगवान सूर्य इस से काफी ज़्यादा प्रसन्न होते है। इस के बाद आप को छोटे से कलश में जल ले कर भगवान सूर्य देव को जल अर्पण करे। फिर आप को गाये के घी का दिया जलाए साथ ही भगवान सूर्य देव को लाल फूल चढ़ाए। ऐसा करने से साधक को सूर्य देव की विशेष किरपा मिलती है।

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साथ ही सही विधि से किया गया कार्य पूजा जीवन की सभी समस्या दूर होती है। अगर आप सच्चे मन से भगवान सूर्य देव की पूजा करते है तो आप को अच्छा फल मिलता है। अगर आप अपने परिवार के साथ मिल कर भगवान सूर्य देव की आराधना करते है तो आप का परिवार हमेशा खुश रहता है। घर में किसी तरह की परेशानी नहीं आती है। परिवार खुशहाल रहता है और घर में सुख सम्पति बनी रहती है।

Ratha Saptami : Sahi Samay 

आइए अब आगे हम बात करते है रथ सप्तमी के सही तारिख और सही समय के बारे में। हिन्दू धर्म में सही समय और सही तारिख पर किया गया आरधना करने से उन के द्वारा की गयी पूजा पाठ का सही फल प्राप्त होता है। हमें हमेशा सही समय और सही ातरीख पर ही किसी भी पर्व की शुरुवात करनी चाहिए। क्योकि हिन्दू धर्म में सही विधि अनुसार करने से आप को किसी भी पाठ का सही फल प्राप्त होता है। अगर आगे हम बात करे रथ सप्तमी के सही तरीख और सही समय की तो रथ सपत्मी को माघ महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है।

Ratha Saptami :- जानिए "सूर्य जयंती" के सही समय, तारिख, विधि और महत्व के बारे में। क्या है रथा सप्तमी का इतिहास ?

यह हर साल इसी दिन मनाया जाता है। साल 2024 में रथ सप्तमी में 16 फरवरी, दिन शुक्रवार को पुरे भारत वर्ष में मनाया जा रहा है। वही हिन्दू पंचाँग के मुताबिक़ रथ सप्तमी को 15 फरवरी 2024 दिन गुरूवार को सुबह 10 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी और 16 फरवरी 2024 को दिन शुक्रवार तक मनाई जायेगी।

Ratha Saptami : Importance 

आप सभी को बता दे कि रथ सप्तमी वसंत ऋतु की शुरुवात और कटाई के मौसम की शुरुवात का प्रतीक है। इस दिन किसान भी सूर्य देव को नमस्कार करते है तथा अपने कृषि में भरपूर फसल होने की कामना करते है। तथा मौसम का अनुकूल रहने का आशीर्वाद मांगते है। इस दिन लोग गंगा पानी से स्नान करते है। साथ ही रथ सप्तमी के दिन लोग आप सूर्य देव से संभंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए। ऐसा करने से आप से सारे दोष दूर हो जाते है, और किसी भी तरह की परेशानी आप के निकट नहीं आती। इस दिन आप को गरीबो की भी सहायता करनी चाहिए।

आप को गरीबो को ज़्यादा से ज़्यादा दान करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान सूर्य देव काफी ज़्यादा प्रसन्न होते है और आप को आशीर्वाद देते है। अगर आप को संतान की कॉमन काफी समय से कर रहे है तो आप को रथ सप्तमी के दिन सच्चे मन से रथ सप्तमी को व्रत रखना चाहिए तथा सूर्य देव की सही विधि विधान के अनुसार पूजा पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से आप को जल्द ही संतान की प्राप्ति होती है। संतान प्राप्ति होने पर आप को सूर्य देव को नमस्कार करना चाहिए। आइए करने से आप के घर काफी सुख समृद्धि आती है।

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इस दिन आप को भगवान सूर्य देव का ज़्यादा से ज़्यादा ध्यान करना चाहिए। आप को इस दिन अपने माता पिता का भी आशीर्वाद ज़रूर लेना चाहिए। काफी लोग इस पर्व को ख़ास मान्यता कर रथ सप्तमी का सही से विधि विधान अनुसार इस पर्व को मनाते है। इस दिन लोगो में काफी ज़्यादा श्रद्धा भाव देख ने को मिलता है। हिन्दू धर्म में सभी पर्व लोगो द्वारा बड़े ही धूम धाम से तथा श्रद्धा भाव से मनाते है। ऐसा करने से आप को महा सुख मिलता है।

Ratha Saptami :- जानिए "सूर्य जयंती" के सही समय, तारिख, विधि और महत्व के बारे में। क्या है रथा सप्तमी का इतिहास ?

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