Savitribai Phule के जन्म दिवस के अवसर पर जानिए इनके द्वारा किये महान कार्यो के बारे में। पढ़िए पूरी ख़बर।

komal

Savitribai Phule :-

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दे कि आज सावित्रीबाई फुले जी का जन्म दिवस है। इनका जन्म आज के ही दिन 3 जनवरी वर्ष 1831 में हुआ था। इनका जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था।  इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे था तथा इनकी माता का नाम लक्ष्मीभाई था। इनका विवाह  वर्ष 1841 में हुआ था। जब इनका विवाह हुआ तो इनकी उम्र 9 साल की थी। इनके पति का नाम ज्योतिराव फुले था। इनके पति ने इनके आगे पढ़ने की रूचि में कोई हस्तछेप नहीं किया बल्कि इन्हे आगे पढ़ने की लिए प्रोत्साहित किया।

बचपन में जब इन्होने पढ़ना शुरू किया तो इन्हे बहुत सी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा था। लोगो ने इन्हे बहुत ताने मारे थे। परन्तु ये मुस्किलो से घबराई नहीं बल्कि डट कर उसका मुकाबला किया। लोगो के जली कटी बाते सुनकर भी इन्होने अपनी शिक्षा नहीं छोड़ी।   हम आपको बता दे कि बचपन से ही सावित्रीबाई फुले बहुत ही निडर स्वाभाव की थी। ये हमेशा परोपकारी के कार्यो में आगे रहती थी। इन्हे लोगो की सेवा करना बहुत ही पसन्द था। इन्हे पढ़ने का बहुत ही ज्यादा शोख था। इन्होने पढ़ लिख कर न केवल अपना ही जीवन सवारा बल्कि बहुत सी महिलाओ को भी आगे बढ़ क्र पढ़ने के लिए प्रोत्साहन दिया।

Bigg Boss 17: नील ने घर से बेघर होने के बाद लगाए विक्की पर संगिम आरोप, जानिए क्या कहा नील भट्ट ने।

1848 में लड़कियों के लिए खोले शिक्षा के द्वार :-

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दे कि सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों को शिक्षित करने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया था। उन्होंने लड़कियों को पढ़ने के लिए बहुत से विद्यालयों की स्थापना भी की थी। इन्होने  वर्ष 1848 पुणे में देश के पहले बालिका स्कूल की स्थापना की थी। हम आपको बता दे की पुणे के इस स्कूल में वे स्वय लड़कियों पढ़ाया करती थी।

Savitribai Phule के जन्म दिवस के अवसर पर जानिए इनके द्वारा किये महान कार्यो के बारे में। पढ़िए पूरी ख़बर।

कहा जाता है कि जब सावित्रीबाई फुले स्कूल में पढ़ाने जाया करती थी तो वह के लोग उन पर गोबर तथा पत्थर बरसाया करते थे लोगो का मानना तथा कि सावित्रीबाई फुले ऐसा करके धर्म के विरुद्ध औरतो को भड़का रही है। सावित्रीबाई फुले हर रोज स्कूल जाते समय एक जोड़ी कपड़े लेकर जाया करती थी क्युकी लोग जब उन पर कीचड़ मारते ठए तो उनके कपड़े गंदे हो जाते थे। स्कूल जाकर वो अपने कीचड़ से लिब्डे कपड़ो को बदला करती थी।

लड़किया पढ़ाई न छोड़े इसके लिए वो उन्हें कई प्रकार की सहायता भी प्रदान करती थी। उन्होंने बच्चो को स्कूल में वजीफा भी देना आरम्भ किया था ताकि बच्चे अपनी शिक्षा को बीच में न छोड़े। हम आपको बता दे कि सावित्रीबाई फुले ने दलितों के लिए अपने घर के बाहर एक कुआ खोदवाया था ताकि कोई भी दलित व्यक्ति प्यासा न मरे उस समय ये एक बहुत बड़ी बात थी क्युकी उस समय समाज में बहुत सी कुप्रथाएं थी। दलित वर्ग का समाज में बहुत शोषण किया जाता था।

Mahindra Bolero Neo में आप को मिल रहा है 17 kmpl का धाकड़ माइलेज। जानिए इस बोलेरो के बेहतरीन फीचर्स और किफायती कीमत के बारे में।

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दे की इन्होने अपने पति के साथ मिलकर  “सत्यशोधक समाज ” की स्थापना भी थी। 1897 में इन्होने अपने बेटे के साथ मिलकर पूणे में एक हस्पताल की स्थापना भी की। उस समय महाराष्ट्र में प्लेग की बीमारी  बहुत ही ज्यादा फैली हुई थी। इन्होने प्लेग पीड़ितों की बहुत सेवा की तथा उनकी सेवा करते करते वो स्वय भी प्लेग से पीड़ित हो गयी तथा 10 मार्च 1897 को हमे अलविदा कह गई।

Share This Article
Leave a comment